Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 126, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 126, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 126 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
श्रेष्ठा संसङ्गता ह्येषा तृतीया भूमिकात्र हि ।
भवति प्रोज्झिताशेषसंकल्पकलनः पुमान् ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
उपायों के साथ वर्णित सफल तृतीय भूमिका का उपसंहार करते हैँ ।
हे श्रीरामचन्द्रजी, यही श्रेष्ठ असंगनामक तीसरी भूमिका हे । इस भूमिका में वर्तमान पुरुष सम्पूर्ण
संकल्प की कल्पनाओं से शून्य हो जाता है