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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 126, Verse 91

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 126, verse 91 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 126 · श्लोक 91

संस्कृत श्लोक

इदं मेऽस्त्विति संवेगमाहुः कल्पनमुत्तमाः । अर्थस्याभावनं यत्तत्कल्पनात्याग उच्यते ॥ ९१ ॥

हिन्दी अर्थ

कल्पनाओं के त्याग से ही मुक्ति होती है, यह आपने पहले अनेक बार कहा है, अव आप इच्छा के त्याग से मुक्ति होती है, यह कैसे कहते हैं, यदि ऐसी आशंका की जाय, तो उस पर कहते हैं। यह मुझे मिल जाय, इस तीव्र इच्छा को ही उत्तम पुरुष कल्पना कहते हैँ ओर बाह्य पदार्थों का जो विस्मरण है, उसको कल्पना का त्याग कहते हैं