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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 13, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 13, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

प्राणापानतया रूढो दृढदेहगुहाशयः । अनन्तसिद्धिदः साधो योगोऽयं बुद्धिदः श्रृणु ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

हे साधो, अब आप यह योग सुनिए जो कि प्राण ओर अपान की समतारूप से प्रसिद्ध है, दृढ़ देहरूपी गुहा का आश्रय करनेवाला है, सिद्धि की इच्छा करनेवालों को खेचरत्व आदि अनन्त सिद्धियों को देनेवाला है ओर ज्ञान की इच्छा करनेवालों को आत्मसाक्षात्कार करानेवाला है, सुनिये