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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 13, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 13, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

असाध्यः कस्यचिद्योगः कस्यचिज्ज्ञाननिश्चयः । मम त्वभिमतः साधो सुसाध्यो ज्ञाननिश्चयः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

किसी के लिए यानी प्राणनिरोधजन्य दुःख के सहने में असमर्थ सुकुमारचेता, पुरुष के लिए योग- हठयोग-असाध्य है और किसी के लिए यानी विचार में अकुशल कठोरचेता पुरुष के लिए ज्ञाननिश्चयरूप दूसरा योग असाध्य है। परन्तु शुद्धचित्त और विचार में कुशल मुझे तो - ज्ञाननिश्चय दूसरा योग ही सुसाध्य है, ऐसा अभिमत है