Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 14, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
इति तेन भुशुण्डोऽसौ भूयः पृष्टेन वर्णितः ।
यथावदेव देवानां सभायां सत्यमुक्तवान् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, कुछ समय के अनन्तर मेने भुशुण्ड के विषय में फिर भी शातातप मुनि से पूछा था,
द्वितीय बार पूछे गये उन मुनिराज ने उसी प्रकार से (जिस प्रकार से देवताओं की सभा में उसका वर्णन
किया था, उसी प्रकार से) इस भुशुण्ड का वर्णन किया | इससे मालूम पड़ा कि भुशुण्ड के विषय में जो
कुछ उन्होंने कहा था, वह सत्य ही कहा था, उनके कथन का तात्पर्य केवल प्रशंसा में ही नहीं
था