Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 14, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
कथावसरसंशान्तावथ याते सुरव्रजे ।
भुशुण्डं विहगं द्रष्टुमहं यातः कुतूहलात् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, कथा का अवसर समाप्त हुआ और देवतागण अपने-अपने निवासस्थान पर
चले गये । तदनन्तर मेँ अत्यन्त उत्कण्ठा से भुशुण्डपक्षी को देखने के लिए चला