Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 14, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
भुशुण्डः संस्थितो यत्र मेरोः श्रृङ्गं तदुत्तमम् ।
संप्राप्तवान्क्षणेनाहं पद्मरागमयं बृहत् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
जहाँ भुशुण्डपक्षी
की स्थिति थी, उस मेरुपर्वत के पद्मरागमणि की तरह चमकी ले सुन्दर एवं विस्तृत शिखर पर मैं क्षणभर
में ही पहुँच गया