Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 14, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
सुमेरुवनदेव्येव नवालक्तकरञ्जितम् ।
लीलयाऽऽदातुमिन्दुं खे नीतं हस्तशिखाङ्गुलिम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
वह लीला से आकाश में स्थित चन्द्रमा को पकड़ने के
लिए लाक्षारस से (महावर से) रंजित शिखा के सदुश मिली हुई - मानों सुमेरु पर्वत की वनदेवी के द्वारा
प्रसारित करांगुलियाँ ही थी