Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 14, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
ज्वालाभिरिव मालाभिररुणाभिः पयोमुखम् ।
खं गन्तुमिव सस्पन्दं शैलस्थमिव वाडवम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
वह जड़ी गयी सोपान-पंक्तियों के सदूश अरुण ज्वालाओं के द्वारा
मानों आकाश में जाने के लिए प्रवृत्त अतएव पर्वत पर चढ़ा हुआ दुग्धाहुति संपन्न मुखवाला
ब्राह्मणसम्बन्धी अध्वाराग्नि की नाईं दीख रहा था