Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 14, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
तत्र कारणतां यातो ब्रह्मा कमलसंभवः ।
स्थितः पितामहत्वेन सृष्टभूतभरभ्रमः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
उस ब्रह्माण्ड में मनु, प्रजापति आदि की उत्पत्ति में कारणता
को प्राप्त तथा प्राणियों के समूहरूप भ्रम को उत्पन्न करनेवाले कमलयोनि ब्रह्मा पितामहरूप से स्थित
है