Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 14, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
तापसं पिङ्गलमिव वेणुदण्डधरं स्थितम् ।
गङ्गानिर्झरनिर्ह्रादि लतागृहगतामरम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पर गंगाजी के झरनों की कलकल ध्वनि हो रही थी, उसके लताकुंजों में देवता विराजित थे, वह
गन्धर्वो के गीतों से रमणीय लगता था और वहाँ मधुर मनोहर सुगन्धित वायु बह रहा था