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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 15, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

विरंचिहंसजानन्यानन्यानग्निशुकोद्भवान् । कौमारबर्हिजानन्यानन्यानम्बरपक्षिजान् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मदेव के वाहन हंस से उत्पन्न ओर भी दूसरे हंसों को, अग्नि के वाहन शुक से उत्पन्न शुकों को, कुमार कार्तिकेय के वाहन मयूर से उत्पन्न और दूसरे मयूरो को तथा इनसे भिन्न भी अन्य आकाश पक्षियों से उत्पन्न पक्षियों को (मैंने देखा)