Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 15, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
द्वितुण्डांश्च भरद्वाजान्हेमचूडान्विहंगमान् ।
कलविङ्कबलान्गृध्रान्कोकिलान्क्रौञ्चकुक्कुटान् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, वहाँ (मेने)
दो चोंचवाले भरद्वाजनामक पक्षियों को, सुवर्ण की शिखावाले पक्षियों को तथा गौरेया, कोआ, गीध,
कोयल, क्रौंच (कुराँकुल) और मुर्गा-इन पक्षियों को (मैंने देखा)