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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 15, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

भासचाषबलाकादीन्बहूनन्यांश्च राघव । भूतौघं जगतीवाहं दृष्टवांस्तत्र पक्षिणः ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

हे राघव, उस कल्पतरु पर शकुन्तपक्षी, नीलकण्ठपक्षी, बलाकपक्षी (बकविशेष) आदि और भी अनेक पक्षियों को, जगत में विविध प्राणियों की नाई मैंने देखा