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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 15, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

प्राणस्पन्दावधानेन नित्यमन्तर्मुखः सुखी । चिरंजीवीति विख्यातश्चिरजीवितया तया ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

वह प्राणक्रिया के निरोध से नित्य अन्तर्मुखवृत्तिवाला, सुखी ओर प्रसिद्धतम चिरजीवी होने से "चिरंजीवी" नाम से प्रसिद्ध था