Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 16, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
मत्पुण्यचिरसंभारप्रेरितेन त्वयाधुना ।
मुने मान्यैकमान्येन कुतश्चागमनं कृतम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, दीर्घकालिक मेरे पुण्य की
राशि से प्रेरित तथा मान्यो में एकमात्र मान्यतम आपका इस समय किस प्रदेश से शुभ आगमन
हुआ ?