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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 16, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

कच्चिदस्मिन्महामोहे चिरं विहरतस्तव । अखण्डितैव समता स्थिता चेतसि पावने ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

महाराज, मूलभूत माया से बने इस जगत में दीर्घकाल से विचरण कर रहे आपके पावनतम चित्त में अखंडित समदर्शिता बिराजती तो है न ?