Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 16, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
किमर्थमद्यागमनक्लेशेनात्मा कदर्थितः ।
वचनश्रवणोत्कानामाज्ञां नो वक्तुमर्हसि ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, आज आने का कष्ट उठाकर आपने अपनी आत्मा को क्यों दुःख पहुँचाया ? आज्ञादायी
वचनों के श्रवण में उत्कण्ठा रखनेवाले हम लोगों को आज्ञा देने के लिए आप सर्वथा योग्य हैं