Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 16, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
ज्ञातत्वदागमोऽप्येवं त्वां पृच्छामीह यन्मुने ।
भवद्वाक्यामृतास्वादवाञ्छितं प्रविजृम्भते ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, यद्यपि यहाँ आपके आने का प्रयोजन मैंने पहले से ही जान लिया, तथापि
आपके वाक्यामृतरसास्वाद की अभिलाषा बढ़ रही है, अतः आपसे मैं पूछता हूँ