Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 16, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
इत्युक्तवानसौ पक्षी भुशुण्डश्चिरजीवितः ।
त्रिकालामलसंवेदी तत्र प्रोक्तमिदं मया ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
तीनों कालों
में निर्मल ज्ञान रखनेवाला चिरंजीवी इस भुशुण्ड ने जब वैसे कहा, तब वहाँ मैंने यह कहा