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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 16, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

आशीतलान्तःकरणो दिष्ट्या कुशलवानसि । पतितोऽसि न बुद्धात्मा भीषणां भववागुराम् ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे पक्षीराज, महान भाग्य से तुम्हारे अन्तःकरण में चारों ओर से शान्ति का राज्य है, तुम कुशल हो, ज्ञाततत्त्व होने के कारण तुम इस भयंकर जगज्जाल में प्रविष्ट नहीं हुए हो