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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 16, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

तदेतं संशयं छिन्धि भगवन्मम सत्यतः । कस्मिन्कुले भवाञ्जातो ज्ञातज्ञेयः कथं भवान् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

प्राणियों की उत्पत्ति, विनाश, गति, आगति, विद्या एवं अविद्या को जाननेवाले हे पक्षिराज, तुम मेरे इस संशय का सत्यरूप से छेदन कर दो कि किस कुल में तुम उत्पन्न हुए हो और किस प्रकार तुमने तत्त्व पहचान लिया