Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 18, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
दृक्पातदग्धशैलेन्द्रं जगत्कवललालसम् ।
भैरवाचरितं यस्य लीलासंत्रासितासुरम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
दुष्टिपातमात्र से शेलेन्द्र हिमराज को दग्ध कर देनेवाला, जगत का ग्रास करने में लालायित
तथा क्रीडामात्र से असुरो को त्रस्त कर देनेवाला भयंकर उनका चरित्र है