Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 18, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
शिरःखुराः खुरकराः करदन्तमुखोदराः ।
ऋक्षोष्ट्राजाहिवक्त्राश्च प्रमथा यस्य लालकाः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
अव सर्वोर्गों में समस्त शक्तियों से परिपूर्ण उनके गणों का वर्णन करते हैं।
जिनके मस्तक खुर की शक्तिर्या रखते हैं यानी दौड़ने-कूदने की शक्तियाँ रखते हैं, खुर हाथों की
शक्त्यो रखते हैं यानी चित्र-विचित्र शिल्पआदि निर्माण-शक्तियाँ रखते हैं, हाथ दाँत, मुख और
उदर की शक्तियाँ रखते हैं यानी चवर्ण, भक्षण आदि शक्तियाँ रखते हैं तथा जिनके भालू, ऊँट, बकरी
और सर्प के सदृश मुख हैं, ऐसे प्रमथों का गण उन महादेवजी के क्रीडन में सहायक है