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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verses 25–26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 18, verses 25–26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

उत्सवं परमं चक्रुः परमार्थप्रकाशकम् । वामस्रोतोगता एतास्तुम्बुरुं रुद्रमाश्रिताः ॥ २५ ॥ पूजयित्वा जगत्पूज्यौ देवौ तुम्बुरुभैरवौ । विचित्रार्थाः कथाश्चक्रुर्मदिरामदतोषिताः ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

वाममार्ग में प्रतिपादित पराशक्ति के आराधन- प्रकार में निष्ठा रखनेवाली इन आठ मातृदेवियों ने तुम्बुरुनामक रुद्रमूर्ति का आराध्यरूप से आश्रय लेकर एकाग्रचित्त से समाधि में परमार्थभूत स्व-स्वरूप का प्रकाशन करनेवाला उत्तम पानोत्सव मनाया