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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 18, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

इत्यष्टैश्वर्ययुक्तास्ता मातरो रौद्रचेष्टिताः । कदाचिन्मिलिता व्योम्नि सर्वाः केनापि हेतुना ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

किसी समय विहारवश भयंकर चेष्टाकारिणी, अष्टसिद्धियों से संपन्न वे सब माताएँ आकाश में इकट्ठी हुई