Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 18, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
अत्यानन्दमनुद्दामरवमेवाम्बरं बभौ ।
दीर्घावयवविक्षेपविकासिजघनोदराः ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस दिन पार्वतीजी का प्रोक्षण किया, उस दिन वहाँ उन सब देवियों ने नृत्य, गेय आदि
से मनोहर महान उत्सव मनाया ॥ ३ १॥ अत्यन्त आनन्द और उन्नत घोष से युक्त आकाश-मण्डल ही
उस समय जगमगाने लगा तथा उन देवियों की जंघा और उदर दीर्घ अंगों के उच्चावच प्रक्षेप से विकसित
होने लगे