Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 18, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
अन्या जहसुरुद्दामतालक्ष्वेडाघनारवम् ।
लसदङ्गविकारं च ध्वनत्सगिरिकाननाः ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
पर्वत और अरण्यों को शब्दित कर रही कुछ अन्य देवियाँ करताल ओर सिंहनाद के
कारण उद्दाम घनीभूत शब्द के उच्चार तथा कान्तियुक्त अंगों के विकारपूर्वक हँसने लगीं