Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 18, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
सुधाकरसुधाधीतं नीलनीरदपल्लवम् ।
तारकाबिन्दुशबलं यस्य चाम्वरमम्बरम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
सुधाकर चन्द्रमा की सुधाधारा से प्रक्षालित, नीलमेघरूपी पल्लवो से युक्त तथा तारारूपी विन्दुओं से
समन्वित आकाश यानी दिशाएँ ही उनके वस्त्र हैं