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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 19, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

भुशुण्ड उवाच । इत्युत्सवे वर्तमाने तासां वाहास्त उत्तमाः । तथैव मत्ता जहसुर्ननृतुः पपुरप्यसृक् ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

वायसराज भुशुण्ड ने कहा : ब्रह्मन, जब उन मातृकाओं का उत्सव चल रहा था, तब उनके उत्तम वाहनरूप चण्ड आदि भी उसी प्रकार उन्मत्त होकर हँसते थे, नाचते थे ओर रुधिर का पान भी करते थे

सर्ग सन्दर्भ

अठारहवाँ सर्ग समाप्त उन्नीसवोँ सर्ग॑ ब्रह्माणी की हंसी में चण्डनामक कौए के सम्बन्ध से भाईयों के साथ अपनी (भुशुण्ड की) उत्पत्ति, उसी ब्राह्मशक्ति के प्रसाद से ज्ञान और पिता के स्थान की प्राप्ति का वर्णन ।