Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 19, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
तत्रैकत्रासवोन्मत्ताः काश्चिन्ननृनुरम्बरे ।
रथहंस्यः स्थिता ब्राहम्यः काकश्चालम्बुसारथः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
उस उत्सव में मद्यपान से उन्मत्त हुई कुछ ब्राह्मीशक्ति के रथ में जुतनेवाली हँसियाँ और
"अलम्बुसा" देवी का वाहन चण्डनामक कोआ - ये सब आकाश प्रदेश में इकडे होकर नाचने लगे