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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 19, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

ब्राह्म्युवाच । हे वत्स्यः सांप्रतं वत्सवत्यो मे रथकर्मणि । न समर्था भवन्त्यो हि स्वैरं चरत सांप्रतम् ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मीशक्ति ने कहा : पुत्रियां, इस समय गर्भवती तुम सब मेरे रथकार्य के लिए असमर्थ हो, इसलिए अव यथेष्ट विचरण करो