Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 19, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
चण्ड उवाच ।
सर्वरत्नगणाधारः समस्तसुरसंश्रयः ।
अस्ति ह्येव महोत्सेधो मेरुर्नाम महीधरः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
पिता चण्ड ने कहा : हे पुत्रो, एक मेरुनामक अत्यन्त ऊँचा पर्वत हे,
वह भाँति-भाँति के अनेक रत्नों का आधार है, उसका संपूर्ण देवता आश्रय करते हैं