Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 19, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
लसच्चन्द्रार्कदीपस्य भूतवृन्दकलत्रिणः ।
ब्रह्माण्डमण्डपस्यान्तः स्तम्भः कनकनिर्मितः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रकाशमान
चन्द्र और सूर्यरूपी दीपक से युक्त अनेकविध प्राणियों के कारण विस्तृत हुए कुटुम्ब से परिवेष्टित
ब्रह्माण्डरूपी घर का वह सुवर्णनिर्मित मध्यस्तंभ है