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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 36

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 19, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

अस्यास्ति पृष्ठे भूतौघवृतः कल्पतरुर्महान् । जगतः शिखरादर्शे प्रतिबिम्बमिव स्थितः ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

इसके पृष्ठभाग में अनेकविध प्राणियों से परिवृत एक महान कल्पवृक्ष स्थित हे, जो कि शिखररूपी विद्रुम-दर्पण में जगत के प्रतिबिम्ब की नाई प्रतीत होता है