Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verses 46–47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 19, verses 46–47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
प्रणामपूर्वं तत्रैतद्यथावत्तत्पितुर्वचः ।
मात्रे च भगवत्यै च ब्राह्म्यै चाशु निवेदितम् ॥ ४६ ॥
ताभ्यां सस्नेहमालिङ्ग्य गच्छतेत्याज्ञयैधिताः ।
वयं कृतनमस्कारा ब्रह्मलोकाद्विनिर्गताः ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पहुँचकर (हम लोगों ने) तत्क्षण ही माता और भगवती
ब्राह्मीदेवी को प्रणामपूर्वक पिता द्वारा कथित अशेष वृत्तान्त अक्षरशः कह सुनाया