Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 19, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
परिहृत्य दिनाधीशं लोकान्तरपुरं गताः ।
स्वर्गमुल्लङ्घ्य याताः स्मो ब्रह्मलोकं मुनीश्वर ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुनीश्वर,
(इसके बाद हम लोग) सूर्य-मण्डल का अतिक्रमण कर स्वर्ग के अमरावती नगर में पहुँचे । स्वर्ग का
अतिक्रमण कर ब्रह्मलोक में पहुँचे