Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 19, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
क्रमेणाकाशमुल्लङ्घ्य निर्गत्याम्बुदकोटरैः ।
पवनस्कन्धमासाद्य वन्दितव्योमचारिणः ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
कर, पवन-लोक प्राप्त कर हम लोगों ने व्योमचारी देवताओं को प्रणाम किया