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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verses 8–9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 19, verses 8–9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 8,9

संस्कृत श्लोक

प्रिया मे भोजने दत्तेत्येवं च शशिशेखरः । बुद्ध्वा बभूव रुषितो यदा मातृगणं प्रति ॥ ८ ॥ तदा तास्तां समुत्पाद्य स्वाङ्गदानेन वै पुनः । ददुर्भूयो विवाहेन पार्वतीमिन्दुमौलये ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

भोजन में मेरी प्रिया ही दी गई है, यों जानकर जब महादेवजी मातृकाओं के प्रति रुष्ट हुए, तब उन्होने अपने-अपने अंगों से सिर आदि एक-एक अवयव की कल्पना द्वारा पार्वती का पुनः उत्पादन कर महादेवजी को फिर पाणिग्रहण विधि से उसे समर्पित किया