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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 19, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

ततो देव्यो हरश्चैव परिवारस्तथैतयोः । सर्वे संतुष्टमनसः स्वां स्वामुपययुर्दिशम् ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

अनन्तर देवियाँ, महादेवजी और उनका परिवार - ये सब सन्तुष्टमन होकर अपनी-अपनी दिशा की ओर चल दिये