Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 2, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 2, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 2 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
कच्चित्स्मरसि यत्प्रोक्तं ह्यो मया रघुनन्दन ।
वाक्यमत्यन्तगुर्वर्थं परमार्थावबोधनम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज
वसिष्ठजी ने कहा : भद्र श्रीरामजी, मेने जो कल सुन्दर पद्धति से अत्यन्त गहन अर्थवाला तथा परमार्थ
का अवबोधक वाक्य कहा था, उसका क्या आप स्मरण करते हैं ?