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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 2, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 2, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 2 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

उपेक्ष्यहेयोपादेयबन्धवो विभवा वपुः । ब्रह्मैव विगताद्यन्तमब्धिवत्प्रविजृम्भते ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

उपेक्ष्य, हेय, उपादेय, बन्धु, सम्पत्तिर्यो, देह इन सभी रूपों से आदि ओर अन्त से शून्य परब्रह्म ही समुद्र की नाई विकसित होता हे