Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 2, Verse 59
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 2, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 2 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
यः पदार्थविशेषोऽन्तर्न त्वं न ह्येव सोऽस्ति ते ।
तदस्यतदसि स्वस्थश्चिद्घनात्मन्नमोऽस्तु ते ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
आप सत्स्वरूप है ओर असत्स्वरूप है, इस अंश का विवरण करते है ।
जो सम्पूर्ण पदार्थो का व्यावृत्तिस्वरूप भीतर का परिच्छेद है, वही असत् होने के कारण असत्-
पदार्थ है, असत्पदार्थरूप आप नहीं हैं, अतः सत्स्वरूप हैं, "सत्" शब्दार्थ ही असत्-व्यावृत्त सद्धर्मरूप
से व्यावहारिक पुरुषों के द्वारा कल्प्यमान होने के कारण सत्ता कहा जाता है, वह भी आपमें नहीं हे, अतः
असत्-स्वरूप हे, इसी आशय से “आप सत् हैं, और असत् हैं” यह कहा गया हे । हे स्वस्वरूप में स्थित
रहनेवाले चिदघन ! आपको प्रणाम है