Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 2, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 2, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 2 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
क्षणात्तत्सदनं मौनं मुनिब्राह्मणराजभिः ।
हस्त्यश्वरथयानैश्च शनैर्नीरन्ध्रतां ययौ ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
क्षणभर में महर्षि वसिष्ठजी का आश्रम
मुनियो, ब्राह्मणों ओर राजाओं से तथा हाथी, अश्व, रथ आदि अन्यान्य यानों से इतना भर गया कि
वहाँ तनिक भी अवकाश नहीं रहा