Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 2, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 2, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 2 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
तत्रैनं पूर्वसंबन्धः कृतसंध्यो महीपतिः ।
दूरमार्गं विनिर्गत्य पूजयामास सादरम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पर त्वरापूर्वक मिलने के उत्साह से सन्ध्या किये हुए महाराज दशरथ ने आदरपूर्वक दूर मार्ग में
ही जाकर महर्षि का पूजन किया