Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
दीर्घायुषो महान्तोऽपि सन्तोऽपि बलिनोऽपि च ।
सर्व एव निगीर्यन्ते कालेनाकलितात्मना ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मन्, यद्यपि दीर्घायु हों, महान हों, सज्जन हों, बलवान
हो, सभी को यह अलकषितस्वरूपवाला काल अपने उदर मेँ समा लेता है