Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
विषमैर्जागतैः क्षोभैरुच्चैस्तरपदस्थितः ।
कथं न क्षोभमायाति कल्पवृक्षोऽयमुन्नतः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
अत्यन्त ऊँचे स्थान पर स्थित हुआ यह उन्नत कल्पवृक्ष जगत के विषम
क्षोभं से क्यों क्षुब्ध नहीं होता ?