Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
संसारव्यवहारोत्थैराशापाशैरसन्मयैः ।
उद्गारैरिव भूकाको न वैवश्यं व्रजाम्यहम् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
सांसारिक
व्यवहारों से जनित असत्रूप आशारूपी पाशों से जिस प्रकार अल्पध्वनियों से प्राकृत काक भयग्रस्त
हो जाता है, उस प्रकार मैं भयग्रस्त नहीं होता