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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

इदं नीडमिमां शाखामहं चायमयं द्रुमः । अद्य पावनतां प्राप्तान्येतानि तव दर्शनात् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

मुनिवर ! यह नीड, यह शाखा, यह मैं, यह कल्पवृक्ष - ये सब आज आपके दर्शन से अत्यंत पवित्र हो गये