Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
इदमर्घ्यमिद पाद्यं गृहीत्वा विहगार्पितम् ।
नूनं पावनतां नीत्वा शेषेणादिश चाशु भोः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
मुनिवर, विहगो (पक्षियों) द्वारा समर्पित इस अर्घ्य
ओर पाद्य का स्वीकार कर एवं हम लोगों को पवित्र बनाकर आप अवशिष्ट सेवा के निमित्त कुछ और
प्रश्न कहने के लिए आज्ञा दीजिए